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 ‘संवादिनी’ के प्रथम अंक का लोकार्पण

‘संवादिनी’ के प्रथम अंक का लोकार्पण

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राजभाषा पत्रिका ‘संवादिनी’ (प्रवेशांक)

मुंबई, 01 जुलाई, 2026
 

राजभाषा हिन्दी के प्रगतिशील प्रयोग, प्रशासनिक उत्कृष्टता तथा संस्थागत ज्ञान-संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए महापत्तन न्यायनिर्णायक बोर्ड (Adjudicatory Board for Major Ports) ने दिनांक 01 जुलाई, 2026 को अपनी प्रथम अर्धवार्षिक राजभाषा पत्रिका ‘संवादिनी’ का भव्य लोकार्पण किया। यह पत्रिका बोर्ड की राजभाषा गतिविधियों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

पत्रिका का लोकार्पण बोर्ड के माननीय पीठासीन अधिकारी, न्यायमूर्ति श्री ए. जे. देसाई, माननीय सदस्य श्री चिर्रावूरी विश्वनाथ तथा माननीय सदस्य  डॉ. संजीव रंजन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर संयुक्त रजिस्ट्रार श्रीमती अनुराधा एच. शर्मा एवं संयुक्त रजिस्ट्रार श्रीमती ज्योति वेंकटाचलम सहित बोर्ड के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए यह कहा गया कि ‘संवादिनी’ केवल एक राजभाषा पत्रिका नहीं, बल्कि संवाद, ज्ञान, सृजन और संस्थागत अनुभवों के आदान-प्रदान का एक सशक्त मंच है। यह पत्रिका राजभाषा हिन्दी के प्रभावी क्रियान्वयन को नई दिशा प्रदान करने के साथ-साथ अधिकारियों एवं कर्मचारियों की रचनात्मक प्रतिभा को अभिव्यक्ति देने का माध्यम बनेगी तथा उत्कृष्ट प्रशासनिक कार्य-संस्कृति को और अधिक समृद्ध करेगी।

अपने संदेश में माननीय पीठासीन अधिकारी न्यायमूर्ति श्री ए. जे. देसाई ने कहा है कि राजभाषा हिन्दी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, बौद्धिक परंपरा और राष्ट्रीय एकात्मता का सशक्त आधार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘संवादिनी’ राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, ज्ञान-विनिमय तथा संस्थागत कार्य-संस्कृति को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

माननीय सदस्य श्री चिर्रावुरी विश्वनाथ ने अपने संदेश में कहा कि हिन्दी प्रशासनिक सरलता, पारदर्शिता और जनसुलभता का आधार है तथा ‘संवादिनी’ संवाद, सृजन और सहभागिता की भावना को सुदृढ़ करने वाली एक सार्थक पहल सिद्ध होगी। वहीं माननीय सदस्य डॉ. संजीव रंजन ने पत्रिका को ज्ञान, विचार और अनुभवों के आदान-प्रदान का प्रभावी मंच बताते हुए इसे राजभाषा हिन्दी के प्रोत्साहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

‘संवादिनी’ का प्रवेशांक (अक्टूबर - मार्च 2026) राजभाषा हिन्दी के संवर्धन के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। पत्रिका में बोर्ड के माननीय पीठासीन अधिकारी एवं माननीय सदस्यों के संदेशों के साथ-साथ संस्थान का परिचय, राजभाषा संबंधी उपयोगी लेख, प्रशासनिक विषय, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, कार्यालयीन हिन्दी, भारतीय भाषाओं, साहित्य, संस्कृति, पर्यावरण तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मौलिक रचनाएँ सम्मिलित की गई हैं।

यह अर्धवार्षिक राजभाषा पत्रिका प्रत्येक वर्ष दो अंकों में प्रकाशित की जाएगी। इसका उद्देश्य राजभाषा हिन्दी के प्रगतिशील प्रयोग को बढ़ावा देना, संस्थागत ज्ञान साझाकरण को प्रोत्साहित करना तथा महापत्तन न्यायनिर्णायक बोर्ड की उपलब्धियों, नवाचारों और श्रेष्ठ प्रशासनिक कार्य-पद्धतियों का प्रामाणिक अभिलेख तैयार करना है।

महापत्तन न्यायनिर्णायक बोर्ड को विश्वास है कि ‘संवादिनी’ भविष्य में राजभाषा हिन्दी के संवर्धन, संस्थागत बौद्धिक विकास तथा उत्कृष्ट प्रशासनिक संस्कृति के सशक्त माध्यम के रूप में स्थापित होगी और सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित करेगी।